Friday, September 13, 2013

आज दिनांक 13 . 09 . 2013 को   टीवी  चेनेल में  निर्भया बलात्कार केस में फांसी की सजा पाये  एक आरोपी अक्षय ठाकुर की माँ एवं पत्नी को रोते हुए तथा यह कहते  हुए सुना कि अब उन्हें कौन देखेगा। जिस तरह का जघन्य अपराध इस आरोपी ने किया था , अगर वह सजा से बच के आजाता और अपने मा एवं पत्नी के लिए भोजन आदि की व्यवस्था करता तो क्या वह मा, वह पत्नी उस जघन्य सामाजिक अपराधी के द्वारा लाये गए अन्न को अपने गले से  उतार पाती। एक नारी हो ने के नाते उस  मासुम बच्ची  निर्भया पर हुए अमानुशिक अत्याचार,उसके लुटते हुए लाज को  एवं असह्य  पीड़ा को क्या वह मा,वह पत्नी याद नही करती, भूल जाती ।  आज भी एतिहासिक फ़िल्म मदर इंडिया का वह मार्मिक दृश्य याद आता है  जिसमें एक गांव की असहाय बूढी   मा अपने लाडले बेटे को इस बात  पर गोली मार देती है कि  वह मा उसके  बेटे  के हाथों एक  लड़की की लाज, जो सारे   गांव की लाज थी, को कलंकित होना नही देखना चाहती थी  भले ही उस लड्की के साहूकार पिता ने उस मा और उसके बेटे पर,उसके परिवार पर कितना ही  अत्याचार किया था.

No comments:

Post a Comment