हम क्यों अपने को दूसरों के सामने महिमामंडित करते है कल जो लोग भगवान मान कर पूजते थे आज हमें संशय की दृष्टि से देख रहे है। कयों हम भगवान बनने की कोशिश करते है क्यों न हम एक इंसान बनने का प्रयास करें जिसमें काम,क्रोध,लोभ,मोह,मद हो पर ये सब हमारे वश में हों,मर्यादा में हों तथा इन प्राकृतिक गुणों का उपयोग हम रचनात्मक कार्यों के लिए करें
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