Sunday, September 1, 2013

हम क्यों अपने को दूसरों  के सामने महिमामंडित करते है कल जो लोग भगवान मान कर पूजते थे आज हमें संशय की दृष्टि से देख रहे है। कयों हम भगवान बनने की कोशिश करते है क्यों न  हम एक इंसान बनने का प्रयास करें जिसमें काम,क्रोध,लोभ,मोह,मद हो  पर ये सब हमारे वश में हों,मर्यादा  में  हों  तथा  इन  प्राकृतिक गुणों का   उपयोग हम रचनात्मक कार्यों के लिए करें  

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